“वंदे मातरम्” गान के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर विधान सभा परिसर में उत्सवमय माहौल
“वंदे मातरम्” गान के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विधान सभा परिसर में आयोजित सामूहिक “वंदे मातरम्” गान और स्वदेशी अपनाने के संकल्प-पाठ में सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह अवसर राष्ट्रप्रेम की ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।
“वंदे मातरम्” गान के पश्चात स्वदेशी अपनाने की सामूहिक शपथ भी ली गई। इस शपथ में सभी को अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने और स्वदेशी को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया गया।
साल 1906 में जब गुजरात के अहमदाबाद में स्वदेशी वस्तुओं का प्रदर्शन आयोजित किया गया था, तब गुजरात की धरती पर पहली बार “वंदे मातरम्” का गायन हुआ था। स्वदेशी वस्तुओं के माध्यम से मातृभूमि के विकास का जो संकल्प उस समय गुजरात की इस पावन भूमि पर लिया गया था, वह आज भी प्रेरणादायी है।
इस गौरवपूर्ण अवसर का उत्सव राज्य के सभी जिला मुख्यालयों, नगरों और गांवों में मंत्रीगण तथा पदाधिकारियों की उपस्थिति में उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है, जो अत्यंत हर्ष का विषय है।

