Loading...

मावठा बारिश से फसलों को भारी नुकसान — किसानों को सहायता भुगतान की कैबिनेट से मंजूरी, जल्द होगी आधिकारिक घोषणा वाघाणी और हर्ष संघवी को प्रवक्ता मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई

मुख्य समाचार:
गुजरात में पिछले कुछ दिनों से हुई असमय मावठा बारिश के कारण कई जिलों में किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने तुरंत स्थिति की समीक्षा के आदेश दिए थे और मंत्रियों को प्रभावित इलाकों का दौरा करने के निर्देश दिए थे। मंत्रियों ने खेतों में जाकर किसानों की स्थिति देखी और नुकसान का आकलन किया।

आज हुई राज्य कैबिनेट बैठक में फसल नुकसान सहायता भुगतान को मंजूरी दी गई है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य के पांच मंत्रियों ने प्रभावित जिलों में जमीनी सर्वे रिपोर्ट तैयार की है, जिसके आधार पर सहायता राशि की घोषणा जल्द की जाएगी।

नई प्रवक्ता मंत्रियों की नियुक्ति

आज उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और जीतू वाघाणी को प्रवक्ता मंत्री की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
दोनों पहले भी इस पद पर रह चुके हैं। इससे पहले यह जिम्मेदारी ऋषिकेश पटेल और कनुभाई देसाई संभाल रहे थे।
अब हर्ष संघवी और जीतू वाघाणी सरकार के निर्णयों और नीतियों की जानकारी मीडिया को देंगे।

 मंत्रियों ने प्रभावित जिलों का दौरा किया

भावनगर:
कृषि मंत्री जीतू वाघाणी ने शिहोर तालुका के काजावदर गांव में किसानों से मुलाकात कर हाल जाना।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं स्थिति पर नजर रख रहे हैं और किसानों को हरसंभव मदद दी जाएगी।

अमरेली:
कानून व न्याय, ऊर्जा व पेट्रोकेमिकल मंत्री कौशिक वकेरिया ने सावरकुंडला के जाबाल और घनश्यामनगर गांवों में जाकर मूंगफली और कपास की फसलों का निरीक्षण किया।
उन्होंने बताया कि तात्कालिक सर्वे के आदेश जारी कर दिए गए हैं, और सरकार किसानों के साथ है।

गिर सोमनाथ:
वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया और सामाजिक न्याय मंत्री डॉ. प्रद्युमन वाजा ने प्रभावित खेतों में जाकर हाल देखा।
सांसद राजेश चुडासमा और स्थानीय नेता भी उनके साथ थे।

तापी:
आदिवासी विकास मंत्री नरेश पटेल ने जिले का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया।


राज्यभर में फसलों को भारी नुकसान

भरूच:
हांसोट क्षेत्र में करीब 90 हजार हेक्टेयर जमीन में बोई गई फसलों को भारी नुकसान हुआ।

राजकोट-बोटाद:
गोंडल और कोटड़ा सांगाणी में मूंगफली की फसलें पानी में डूब गईं, कटाई भी रुक गई है।

वडोदरा:
छाणी, सोकड़ा और ओंकारपुरा गांवों में लहसुन, मेथी, चारा और सब्जियों को नुकसान हुआ है।

दाहोद:
धान के खेतों में पानी भर जाने से फसलें सड़ गई हैं।

सुरेन्द्रनगर:
किसानों में चिंता है कि 2024 की सहायता अभी तक नहीं मिली, अब इस साल के नुकसान की भरपाई कब होगी यह स्पष्ट नहीं है।

Image Gallery