पिछले तीन वर्षों में शाला स्वास्थ्य – राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के 4.5 करोड़ से अधिक बच्चों को लाभ मिला।
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के सुशासन के तीन वर्ष : जन–जन तक पहुँची स्वास्थ्य सेवाएँ
इस कार्यक्रम के अंतर्गत पिछले तीन वर्षों में बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर 17.5 हजार से अधिक हृदय संबंधी सर्जरी व उपचार, 4,149 किडनी उपचार, 2,336 क्लबफुट, 1,408 क्लेफ्ट लिप–पैलेट तथा 692 कैंसर रोगों का उपचार किया गया।
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल ने अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूर्ण किए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात की विकास यात्रा को नई गति दी है। ये तीन वर्ष सेवा, संकल्प और समर्पण के प्रतीक बने हैं। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री प्रफुल पानशेरिया के नेतृत्व में आज स्वास्थ्य से जुड़ी जनकल्याणकारी योजनाएँ अंतिम छोर के नागरिकों तक पहुँच रही हैं। इसी कड़ी में पिछले तीन वर्षों में शाला स्वास्थ्य – राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के 4.5 करोड़ से अधिक बच्चों ने इस योजना का लाभ लिया है।
इस योजना के तहत राज्य में प्रतिवर्ष औसतन 1 करोड़ 89 लाख से अधिक बच्चों की स्वास्थ्य जाँच कर मौके पर ही उपचार किया जाता है। इसके अतिरिक्त आवश्यकता वाले बच्चों को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों—PHC, CHC, SDH, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज व अस्पताल तथा सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों—में रेफर कर पूर्णतः निःशुल्क उपचार प्रदान किया जाता है।
मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के सुशासन के अंतर्गत, पिछले तीन वर्षों में बच्चों की स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान कर 45 हजार से अधिक बच्चों को हृदय संबंधी सर्जरी व उपचार, 4,149 किडनी उपचार, 2,336 क्लबफुट, 1,408 क्लेफ्ट लिप–पैलेट, 692 कैंसर उपचार, 751 कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी, 42 किडनी ट्रांसप्लांट, 23 बोन मैरो ट्रांसप्लांट तथा 12 लीवर ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई है।
शाला स्वास्थ्य – राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों के निदान, रेफरल और उपचार हेतु राज्य में जिला स्तर पर कुल 28 डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DIEC) कार्यरत हैं। इसके अलावा राज्य में कुल 992 RBSK मोबाइल हेल्थ टीमें सक्रिय हैं। ये टीमें 6 वर्ष तक के आंगनवाड़ी बच्चों, प्राथमिक विद्यालयों, माध्यमिक–उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों तथा नवजात शिशु से 18 वर्ष तक के स्कूल जाने वाले और न जाने वाले बच्चों की स्वास्थ्य जाँच कर उपचार प्रदान करती हैं।
इस कार्यक्रम के तहत राज्य के सभी डिलीवरी प्वाइंट्स पर प्रत्येक नवजात शिशु की जन्म दोष (बर्थ डिफेक्ट) स्क्रीनिंग की जाती है। साथ ही नवजात शिशु से 6 वर्ष तक के आंगनवाड़ी बच्चे, कक्षा 1 से 12 तक अध्ययनरत सभी विद्यार्थी तथा 18 वर्ष तक के स्कूल जाने वाले और न जाने वाले बच्चों की “4D” (बर्थ डिफेक्ट, डेवलपमेंटल डिले, डिज़ीज़ और डिफ़िशिएंसी) के लिए नियमित स्वास्थ्य जाँच कर आवश्यक रेफरल सेवाओं के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

