अरावली पर्वतमाला को लेकर फैली अफवाहों पर स्पष्ट हुई हकीकत
सोशल मीडिया पर अरावली पर्वतमाला को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक जानकारियों को लेकर अब वास्तविक स्थिति सामने आ रही है। हाल ही में यह प्रचार किया गया कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले सभी अरावली पर्वत हटा दिए जाएंगे, जिससे मरुस्थलीकरण रोकने वाली भारत की प्राकृतिक ढाल समाप्त हो जाएगी।
हालांकि, कानूनी और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार 100 मीटर का आशय पर्वत की कुल ऊंचाई से नहीं, बल्कि पर्वत के आधार (बेस) से माप से जुड़ा है। अर्थात जमीन की सतह से 100 मीटर तक का क्षेत्र नियमन के अंतर्गत आता है—इसका यह अर्थ नहीं है कि पूरे पर्वतों को काटा जाएगा।
इस विषय पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने भी स्पष्ट किया है कि अरावली पर्वतमाला के संरक्षण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और गलतफहमी के आधार पर भ्रम फैलाना उचित नहीं है। वास्तविक मुद्दा अवैध खनन, भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन और पर्यावरण कानूनों के सख्त अमल से जुड़ा हुआ है।
पर्यावरणविदों का कहना है कि अरावली केवल पर्वत श्रृंखला नहीं है, बल्कि मरुस्थलीकरण रोकने वाली प्राकृतिक ढाल, भूजल पुनर्भरण और जलवायु संतुलन का महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए किसी भी विकास संबंधी निर्णय से पहले वैज्ञानिक अध्ययन, पर्यावरणीय प्रभाव और दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
अरावली को लेकर फैल रही अफवाहों से दूर रहकर आधिकारिक स्पष्टीकरण और कानूनी वास्तविकताओं को समझना जरूरी है। अरावली का संरक्षण अनिवार्य है—लेकिन चर्चा तथ्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित होनी चाहिए।
रिपोर्टर : हर्ष सोनी

