प्रवासी पक्षियों से लेकर दुर्लभ वन्य प्राणियों तक, गुजरात आज सुरक्षित और अनुकूल आवास स्थल के रूप में उभरा है।
विश्व वन्यजीव संरक्षण दिवस के अवसर पर गुजरात राज्य ने वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता संरक्षण और प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दर्ज कराकर देश-विदेश में एक विशिष्ट पहचान बनाई है। प्रवासी पक्षियों से लेकर दुर्लभ वन्य प्राणियों तक, गुजरात आज सुरक्षित और अनुकूल आवास स्थल के रूप में उभरा है।
???? वन्यजीव संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि
वर्ष 2023 की वन्यजीव आबादी गणना के अनुसार राज्य में शेर, मोर, नीलगाय, काला हिरण, तेंदुआ, सांभर, चिंकाड़ा सहित लगभग 21 प्रजातियों की कुल आबादी 9.53 लाख से अधिक दर्ज की गई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता दर्शाती है।
???? एशियाई शेरों की संख्या ऐतिहासिक स्तर पर
वर्ष 2001 में 327 रही एशियाई शेरों की संख्या वर्ष 2025 में बढ़कर 891 तक पहुंच गई है। शेरों के बाद गुजरात अब बाघ का भी सुरक्षित आवास स्थल बनता जा रहा है।
???? प्रवासी पक्षियों के लिए गुजरात पहली पसंद
वर्ष 2024-25 में राज्य के विभिन्न जल-भराव क्षेत्रों में लगभग 18 से 20 लाख प्रवासी पक्षी दर्ज किए गए। पिछले 14 वर्षों में थोल पक्षी अभयारण्य में 355% तथा नलसरोवर पक्षी अभयारण्य में 276% की वृद्धि दर्ज की गई है।
???? कच्छ में पहला ‘चीताः संरक्षण प्रजनन केंद्र’
गुजरात में पहली बार कच्छ के बन्नी क्षेत्र में ‘चीता कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर’ स्थापित किया जाएगा, जो इस दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

