पुलिस की छवि सुधारने एवं मानव अधिकारों के संरक्षण को लेकर राज्य के डीजीपी डॉ. के.एल.एन. राव द्वारा एक महत्वपूर्ण परिपत्र जारी किया गया है।
जारी निर्देशों के अनुसार, पुलिस जांच के दौरान आरोपियों का सार्वजनिक रूप से जुलूस निकालना, उठक-बैठक करवाना अथवा किसी भी प्रकार का अपमानजनक व्यवहार करना सख्त रूप से प्रतिबंधित किया गया है।
परिपत्र में स्पष्ट किया गया है कि आरोपियों को सार्वजनिक स्थानों पर रस्सी से बांधकर घुमाना या उनका सरघस निकालना अमानवीय कृत्य की श्रेणी में आता है। इस प्रकार की घटनाओं से पुलिस विभाग की छवि धूमिल होती है तथा मानव अधिकारों का उल्लंघन होता है।
डीजीपी कार्यालय द्वारा सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कानून के दायरे में रहकर मानवीय संवेदनाओं के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


